Scarcity of drinking water

शुद्ध पेयजल की किल्लत से जूझ रहे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड जैसे राज्य केंद्र से आवंटित धन का इस्तेमाल करने में भी फिसड्डी निकले। ये राज्य 2011-12 में दिसंबर तक पेयजल के लिए केंद्र से मिली राशि का 60 फीसदी खर्च नहीं कर पाए। इस खराब प्रदर्शन का इन राज्यों को दोहरा नुकसान हुआ है। एक तो इनकी पेयजल परियोजनाएं पूरी नहीं हो पाई और दूसरा ग्रामीण विकास मंत्रालय से मिलने वाली बोनस राशि (अतिरिक्त मदद) से भी इन्हें वंचित होना पड़ा। इसके विपरीत पंजाब, हरियाणा और गुजरात समेत आधा दर्जन से अधिक राज्यों ने पेयजल आपूर्ति में बेहतर प्रदर्शन करके बोनस का लाभ लिया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर बधाई के साथ बोनस का तोहफा भी दिया है। दरअसल जयराम रमेश ने दिसंबर 11 तक पेयजल आपूर्ति के लिए आवंटित धन का 60 फीसदी हिस्सा खर्च कर देने वाले राज्यों को बोनस राशि देने की घोषणा की थी। बोनस के रूप में मिलने वाली अतिरिक्त राशि कुल आवंटन का लगभग 25 फीसद है। रमेश ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में पूर्ण स्वच्छता और पेयजल आपूर्ति में अच्छा कार्य करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए धन की कोई कमी नहीं आने पाएगी। हरियाणा को स्वच्छता व पेयजल आपूर्ति में बेहतर प्रदर्शन करने पर 35 करोड़ रुपये और पंजाब को 46.82 करोड़ रुपये बोनस दिया गया है। गुजरात ने पेयजल के मद में आवंटित 423 करोड़ रुपये में गत 11 दिसंबर तक 300 करोड़ से अधिक खर्च कर लिए थे। इसके एवज में गुजरात को 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद मुहैया कराई गई है।